
(हरियाणा में भाजपा लगातार 10 वर्षों से सत्ता पर काबिज है। लेकिन इस बार भाजपा के लिए हरियाणा का सियासी रणक्षेत्र जीतना आसान नहीं होगा। पिछले कुछ वर्षों से पीएम मोदी राज्यों में पुराने और अनुभवी नेतृत्व को दरकिनार करते हुए नए चेहरों पर दांव लगाते रहे हैं। भाजपा ने इस बार यही फार्मूला हरियाणा में भी शुरू किया। लेकिन पार्टी का यह दांव उल्टा पड़ गया। भाजपा ने एक साथ 67 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया। निकाली गई प्रत्याशियों की लिस्ट में कई दिग्गज नेताओं को किनारे कर दिया गया। जिसके बाद भाजपा में बगावत, भगदड़ और इस्तीफे शुरू हो गए। हरियाणा विधानसभा में टिकट नहीं मिलने के बाद से पूर्व मंत्री करणदेव कंबोज, रणजीत चौटाला, हरियाणा बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर मांडी, रतिया विधायक लक्षमण नापा समेत शमशेर गिल इस्तीफा दे दिया है। वहीं, देश की सबसे अमीर महिला सावित्री जिंदल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दूसरी ओर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी हरियाणा चुनाव में भाजपा के खिलाफ पूरे लय में आ गए हैं।
सात महीने पहले मार्च 2024 को भाजपा हाईकमान ने हरियाणा में साढ़े नौ साल मुख्यमंत्री रहे मनोहर लाल खट्टर को अचानक हटाकर नायब सिंह सैनी को कमान दे दी थी। तभी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी। वहीं मुख्यमंत्री के पद से हटाए गए मनोहर लाल खट्टर को केंद्र में पीएम मोदी ने अपनी टीम में मंत्री बना दिया । भाजपा हाईकमान के इस फैसले से मनोहर लाल खट्टर भी खुश थे। लोकसभा चुनाव में भाजपा को केंद्र में सरकार बनाने के लिए पूर्ण जनादेश नहीं मिला। पार्टी 240 सीटों पर ही सिमट गई और सहयोगियों के साथ केंद्र में सरकार बनाई। खैर ! यह सियासत की पुरानी बातें हैं। अब बात करते हैं हरियाणा विधानसभा चुनाव की। इस राज्य में भाजपा लगातार 10 वर्षों से सत्ता पर काबिज है। लेकिन इस बार भाजपा के लिए हरियाणा का सियासी रणक्षेत्र जीतना आसान नहीं होगा। पिछले कुछ वर्षों से पीएम मोदी राज्यों में पुराने और अनुभवी नेतृत्व को दरकिनार करते हुए नए चेहरों पर दांव लगाते रहे हैं। इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, गुजरात त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों में भाजपा ने सभी को चौंकाते हुए नए चेहरों को सत्ता सौंप दी थी। भाजपा ने इस बार यही फार्मूला हरियाणा में भी शुरू किया। लेकिन पार्टी का यह दांव उल्टा पड़ गया। अगले महीने 5 अक्टूबर को 90 सीटों पर एक चरण में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने एक साथ 67 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया। निकाली गई प्रत्याशियों की लिस्ट में कई दिग्गज नेताओं को किनारे कर दिया गया। जबकि यह सभी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तैयारी बनाए हुए थे। भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची में पार्टी ने कई सीटिंग विधायकों और हारे हुए विधायकों का टिकट काट दिया है, जो अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय नजर आ रहे थे। हालांकि, ऐसे कई मौजूदा मंत्रियों और विधायकों को टिकट दिया गया है, जिनके खिलाफ उनके क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर हावी है। भाजपा की लिस्ट जारी होने के बाद कई जिलों में पार्टी के पुराने नेता नाराज हैं। इनमें पूर्व मंत्री और विधायक भी शामिल हैं। पार्टी ने कई दल-बदलुओं को उम्मीदवार घोषित किया है, जो पार्टी के कर्मठ नेताओं को रास नहीं आ रहा है। आलाकमान के इस फैसले के बाद नाराजगी और बढ़ गई। जिसके बाद भाजपा में बगावत, भगदड़ और इस्तीफे शुरू हो गए। हरियाणा विधानसभा में टिकट नहीं मिलने के बाद से पूर्व मंत्री करणदेव कंबोज, रणजीत चौटाला, हरियाणा बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर मांडी, रतिया विधायक लक्षमण नापा समेत शमशेर गिल इस्तीफा दे दिया है। वहीं, देश की सबसे अमीर महिला सावित्री जिंदल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। टिकट नहीं मिलने पर पूर्व मंत्री कविता जैन ने भी इस्तीफा दे दिया और इस दौरान वह रोती हुई भी नजर आईं। भाजपा टिकट सूची आने के बाद से अब तक 250 से अधिक नेता और कार्यकर्ता इस्तीफा दे चुके हैं। इस्तीफे का दौर अभी भी जारी है। कई नेताओं ने बीजेपी उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरने का फैसला भी किया। इस्तीफों की झड़ी लगने के बाद सीधे हाईकमान की तरफ से डैमेज कंट्रोल करने के लिए बागी हुए नेताओं से संपर्क साधा गया। केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्री नायब सैनी ने खुद बागियों से फोन पर बात करने के अलावा मिलने के लिए भी बुलाया। लेकिन अभी भी हरियाणा में भाजपा नेताओं के बगावती तेवर बरकरार हैं। 90 सीटों में से भाजपा ने अभी 67 ही उम्मीदवार घोषित किए हैं। एक-दो दिन बाद भाजपा 23 प्रत्याशियों के नामों का और एलान करेगी । ऐसी संभावना है कि अगर भाजपा ने फिर वही पहले जैसा फार्मूला अपनाया तो पार्टी के पुराने नेताओं में बगावत और बढ़ेगी। हरियाणा में टिकट बंटवारे को लेकर नेताओं में नाराजगी भाजपा को भारी पड़ने लगी है। अगर पार्टी ने बगावती नेताओं की नाराजगी दूर नहीं की तो यह उसके लिए चुनाव में भारी भी पड़ सकता है। हरियाणा में भाजपा को विरोध की तो उम्मीद थी, लेकिन ज्यादा बगावत की नहीं थी। हालांकि, पार्टी का कहना है कि इतना विरोध स्वाभाविक है। अभी पार्टी को और उम्मीदवार घोषित करने हैं। इसलिए यह संख्या बढ़ भी सकती है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस हरियाणा में सत्ता पर काबिज होने के लिए पूरे जोश में है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी हरियाणा चुनाव में भाजपा के खिलाफ दो बड़े मोहरों, ओलंपिक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को लेकर चुनावी मैदान में कूद गए हैं । हरियाणा चुनाव में दो दशकों से भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता आया है।
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Author: AK
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