
भाजपा और कांग्रेस के बीच अब एक और नया विवाद ‘लेटरल एंट्री’ को लेकर गहराता जा रहा है। तीन दिनों से दोनों पार्टियों को नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में लगे हुए हैं। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने आरोप लगाए हैं कि सरकार इन फैसलों के जरिए आरक्षण समाप्त करने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि लेटरल एंट्री का प्रस्ताव सबसे पहले कांग्रेस शासन में ही लाया गया था। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने उन लोगों के नाम भी गिनाई जिनकी यूपीए सरकार में लेटरल एंट्री हुई थी। बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग यूपीएससी ने 17 अगस्त को लेटरल एंट्री भर्ती के लिए 45 पोस्ट पर वैकेंसी निकाली। इसका विरोध करते हुए राहुल गांधी ने कहा था- लेटरल एंट्री के जरिए खुलेआम एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग का हक छीना जा रहा है। मोदी सरकार आरएसएस वालों की लोकसेवकों में भर्ती कर रही है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का कहना है कि सरकार का यह फैसला आरक्षण विरोधी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह की 1976 में वित्त सचिव के पद पर नियुक्ति किस व्यवस्था के तहत हुई थी? तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आर्थिक विशेषज्ञ के रूप में मनमोहन सिंह को सीधे वित्त सचिव बनाया था, जो बाद में वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री भी बने। अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा, कांग्रेस शासन में सैम पित्रोदा, वी कृष्षणमूर्ति, अर्थशास्त्री बिमल जालान, कौशिक विरमानी, रघुराम राजन जैसे लोगों को सरकार में शामिल किया गया। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को 2009 से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का प्रमुख नियुक्त किया गया था।केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी लेटरल एंट्री भर्ती पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा- सरकारी नियुक्ति में आरक्षण होना चाहिए, इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं हो। निजी क्षेत्र में आरक्षण नहीं है। सरकारी पदों पर इसे लागू नहीं करते हैं, तो चिंता की बात है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री आरक्षण के समर्थन में है। लेटरल एंट्री के जरिए कुछ पदों पर सीधी भर्ती हो रही है, जिसमें आरक्षण को ध्यान में नहीं रखा गया है। उससे मैं और मेरी पार्टी सहमत नहीं है। हम इसके पूरी तरह से खिलाफ हैं। सरकार का हिस्सा होने के नाते हमने सरकार के सामने भी चिंता जाहिर की है। आने वाले दिनों में भी हम इस पर मजबूती से आवाज उठाएंगे। माकपा के डी राजा ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम भाजपा-संघ के लोगों का शीर्ष सरकारी पदों पर कब्जा करने की रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले सरकार ने सरकारी कर्मियों के संघ की गतिविधियों में हिस्सा लेने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, ‘भाजपा का राम राज्य का विरुपित संस्करण संविधान को तहस-नहस करना है और यह बहुजन से आरक्षण का हक छीनना चाहता है। बता दें कि लेटरल एंट्री का मतलब बिना एग्जाम के सीधी भर्ती से है। लेटरल एंट्री के जरिए केंद्र सरकार यूपीएससी के बड़े पदों पर प्राइवेट सेक्टर के एक्सपर्ट्स की सीधी भर्ती करती है। इसमें राजस्व, वित्त, आर्थिक, कृषि, शिक्षा जैसे सेक्टर्स में लंबे समय से काम कर रहे लोग शामिल होते हैं। सरकार के मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी, डायरेक्टर्स और डिप्टी सेक्रेटरी की पोस्ट पर भर्ती लेटरल एंट्री से की जाती है। यूपीएससी में लेटरल एंट्री की शुरुआत साल 2018 में हुई थी। इसमें जॉइंट सेक्रेटरी लेवल की पोस्ट के लिए 6077 एप्लीकेशन आए। यूपीएससी की सिलेक्शन प्रोसेस के बाद 2019 में अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में 9 नियुक्ति हुई।
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Author: AK
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