
लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक मूड में है। एक दिन पहले शुक्रवार को खत्म हुए बजट सत्र दौरान सदन में विपक्ष ने अपनी ताकत का एहसास भी कराया। कांग्रेस के साथ विपक्ष के कई नेताओं को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पसंद नहीं आ रहे हैं। सपा की सांसद जया बच्चन और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बीच हुए टकराव के बाद यह स्थिति और बिगड़ गई है। राज्यसभा में जया बच्चन और सभापति जगदीप धनखड़ के बीच तीखी बहस हुई। जया ने धनखड़ की टोन पर सवाल उठाया, जिससे वे नाराज हो गए। विपक्ष ने धनखड़ पर पक्षपात का आरोप लगाया और अब अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। विपक्ष तो इस बीच वॉकआउट भी कर गया। जया बच्चन से हुई बहस के बाद पूरा विपक्ष जगदीप धनखड़ के खिलाफ लामबंद हो गया है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन में शामिल कई दलों ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ का रवैया पक्षपातपूर्ण दिखाई देता है। हालत यह है कि नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने नहीं दिया जाता। बार-बार उनका माइक बंद कर दिया जाता है। इस मामले में सभापति जगदीप धनखड़ और इंडी गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच गतिरोध बढ़ गया है। विपक्षी दल राज्यसभा सभापति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने सभापति जगदीप धनखड़ पर पक्षपात का आरोप लगाया। विपक्ष के 87 सांसद नोटिस पर साइन कर चुके हैं। हालांकि प्रस्ताव के पारित होने की उम्मीद कम ही है ।उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। उन्हें हटाने के लिए राज्यसभा में बहुमत से प्रस्ताव पारित कराना होगा। प्रस्ताव लाने से 14 दिन पहले नोटिस भी देना होगा। बता दें कि राज्यसभा में अभी 225 सदस्य हैं। भाजपा के 86 सदस्यों समेत एनडीए के 101 सांसद हैं। इंडिया ब्लॉक के 87 सदस्य हैं। ऐसे में वाईएसआरसीपी के 11, बीजद के 8 और अन्नाद्रमुक के 4 सदस्यों को मिलाकर 23 सदस्यों की भूमिका (कुल 110) अहम होगी। हालांकि, 3 सितंबर को राज्यसभा की 12 सीटों के चुनाव हैं। कम से कम 10 सीटें भाजपा को मिलेंगी। यानी उसकी सीटें 96 हो जाएगी और एनडीए की सीटें 111 हो जाएंगी। 12 सदस्य बढ़ने से राज्यसभा में 237 सदस्य हो जाएंगे और बहुमत 119 पर होगा। अब राज्यसभा की अगली बैठक इस चुनाव बाद ही होगी। ऐसे में अन्य पार्टियों BRS (4), BSP (1), MDMK (1) और अन्य स्वतंत्र सदस्य साथ देकर या अनुपस्थित रहकर वोटिंग प्रभावित कर सकते हैं। वहीं लोकसभा में भी प्रस्ताव पारित कराना जरूरी होगा, क्योंकि राज्यसभा का सभापति उपराष्ट्रपति की पदेन भूमिका होती है। लोकसभा में एनडीए के 293 और इंडिया के 236 सदस्य हैं। बहुमत 272 पर है। विपक्ष अन्य 14 सदस्यों को साधे तो भी प्रस्ताव पारित होना मुश्किल होगा।जब प्रस्ताव पेश होगा और चर्चा होगी, तब सामान्य न्याय सिद्धांत के मुताबिक सभापति राज्यसभा पीठ पर नहीं बैठेंगे।
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Author: AK
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