
दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में स्थित करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र तिरुपति मंदिर दो पार्टियों के बीच राजनीति का अखाड़ा बन गया है। बुधवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और चंद्रबाबू नायडू ने पिछली जगन मोहन सरकार पर तिरुपति मंदिर में मिलने वाले प्रसादम को लेकर बड़ा संगीन आरोप लगाया। जिसके बाद राज्य की सत्तारूढ़ सरकार और पूर्व सरकार के नेताओं के बीच जंग छिड़ी हुई है। आइए जानते हैं पूरा मामला । बता दें तिरुपति मंदिर भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है, जहां हर साल लगभग तीन करोड़ हिन्दू दर्शन करने के लिए आते हैं और इन सभी हिन्दू श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डू दिए जाते हैं। इस पूरी व्यवस्था का संचालन उस समिति के द्वारा किया जाता है, जिसका गठन हर दो साल में आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार करती है। इस समिति का नाम है तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् और यही समिति प्रसाद के लड्डुओं को बनाने के लिए सभी सामग्री को खरीदती है। बुधवार को सीएम चंद्रबाबू नायडू ने पिछली वाईएसआरसीपी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने तिरुपति मंदिर के लड्डू के बनाने में घटिया सामग्री और जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल करते थे। नायडू ने एनडीए विधायक दल की बैठक को संबोधित करते हुए इसका दावा किया है।
सीएम नायडू ने कहा, मुझे लैब से जो रिपोर्ट मिली है उससे स्पष्ट है कि प्रसाद की गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया, उसमें अपवित्र वस्तुओं की मिलावट की बात सामने आई है। इन सबके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है, कुछ को काम से हटा भी दिया गया है। प्रसाद की पवित्रता का पूरा ध्यान रखते हुए अब शुद्ध घी इस्तेमाल किया जा रहा है। श्रद्धालु भी इस कार्यवाही से संतुष्ट हैं। इस सिलसिले में और भी जांच की जा रही है, सुबूत जुटाए जा रहे हैं। इस अनियमियता में जो भी शामिल पाया गया उसके खिलाफ कठोर एक्शन लिया जाएगा। एन चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार ने तिरुमला स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को अपवित्र किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान तिरुमला के श्रद्धालुओं को घटिया भोजन परोसा गया, जिससे न केवल इसकी पवित्रता को ठेस पहुंची, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी ठेस पहुंची है। नायडू ने एक बयान में कहा कि प्रसादम बनाने के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किए जाने के सबूत मिलने के बाद, हम इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। नायडू ने बुधवार को अमरावती में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) विधायक दल की एक बैठक को संबोधित करते हुए दावा किया था कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार ने श्री वेंकटेश्वर मंदिर को भी नहीं बख्शा और लड्डू के निर्माण में भी घटिया सामग्री और पशु चर्बी का इस्तेमाल किया। वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य वाईवी सुब्बा रेड्डी ने कहा कि नायडू के आरोपों से देवता की पवित्र प्रकृति को नुकसान पहुंचा है और भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। सुब्बा रेड्डी ने कहा, यह कहना भी अकल्पनीय है कि भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद और भक्तों को दिए जाने वाले लड्डुओं में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया गया था। पशु चर्बी के इस्तेमाल का आरोप लगाना एक घिनौना प्रयास है। उन्होंने कहा, मैं वेंकटेश्वर स्वामी में आस्था रखता हूं और आप (नायडू) भी उनके भक्त होने का दावा करते हैं, इसलिए आइए देवता के सामने शपथ लें। मैं देवता के सामने शपथ लेने के लिए तैयार हूं। मैं अपने परिवार के साथ आकर शपथ लूंगा। जानकारी के मुताबिक तिरुपति मन्दिर को हर साल जो लगभग तीन हजार करोड़ रुपये का चढ़ावा और दान मिलता है। इसमें से लगभग 500 से 600 करोड़ रुपये लड्डुओं के उन प्रसाद को बेचकर आते हैं, जिनमें अब मिलावट होने के आरोप लग रहे हैं और ये काफी बड़ी बात है कि जो 500 करोड़ के लड्डू प्रसाद के रूप में बेचे गए, उनमें जानवरों की चर्बी और उनका फैट हो सकता है और इसके लिए पूर्व सरकार को ज्यादा दोषी इसलिए माना जाएगा क्योंकि इस मन्दिर से उसे हर साल 50 करोड़ रुपये मिल रहे थे।
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Author: AK
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