
इस लोकसभा चुनाव से पहले जब-जब संसद की कार्यवाही होती थी तब पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी सदन में भाजपा और पीएम मोदी को लेकर ताबड़तोड़ प्रहार करते थे। सदन में अधीर रंजन की बातें सुनकर पास बैठीं सोनिया गांधी और राहुल गांधी बहुत खुश हुआ करते थे। लोकसभा और राज्यसभा सदन में कांग्रेस पार्टी की ओर सबसे बुलंद आवाज अधीर रंजन चौधरी ही उठाते रहे हैं। अपने आक्रामक रवैए की वजह से अधीर चौधरी सोनिया गांधी के भी करीब रहे हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव में अधीर रंजन को मिली हार के बाद पार्टी में उनका सियासी ग्राफ नीचे होता चला गया। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दबाव के आगे कांग्रेस आलाकमान ने चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर दूरी भी बना ली है। बता दें कि अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धुर विरोधी माने जाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर इंडी गठबंधन में शामिल होने पर भी पिछले लोकसभा चुनाव में बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बन पाने का कारण अधीर को बताया जा रहा था। ममता ने भी बंगाल में अधीर को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसा मजबूत प्रत्याशी उतार दिया और अधीर को छठी बार बहरमपुर से सांसद बनने से रोक दिया। चौधरी के इस्तीफे की खबर के बीच अब टीएमसी, भाजपा और माकपा सबकी नजर इस पर टिकी है कि बंगाल कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन होगा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस वाला कमान के रवैये से आहत होकर चौधरी भी बगावत के मूड में आ गए हैं।
कांग्रेस के पूर्व सांसद चौधरी का कहना है कि वह खुद यह पद छोड़ना चाहते थे। हालांकि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के तरीके को लेकर नाराजगी जताई है। अधीर रंजन चौधरी ने खुले शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘कल पार्टी ने जिस तरह से कहा, वह मेरे लिए शर्मनाक है। नतीजे खराब थे, मैंने खुद उन्हें दूसरे व्यक्ति की तलाश करने के लिए कहा था। मुझे दिल्ली आकर चर्चा करने के लिए कहा गया था, लेकिन जिस तरह से (गुलाम अहमद) मीर ने कल कहा कि मैंने इस्तीफा दे दिया है, मुझे नहीं पता कि पार्टी ने इसे ऐसे ही रखने का फैसला किया है। मुझे कभी भी पद की इच्छा नहीं रही, लेकिन यह शर्मनाक है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी निशाना साधा और कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे के अध्यक्ष बनते ही देशभर के सभी पद अस्थायी हो गए। बहरमपुर से पूर्व सांसद ने चुनाव के दौरान टेलीविज़न पर की गई खड़गे की टिप्पणी पर भी निराशा जताई, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि जरूरत पड़ने पर चौधरी को बदला जा सकता है। अधीर ने कहा, ‘मेरा पद भी तो अस्थायी था। चुनाव के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने टीवी पर कह दिया कि जरूरत पड़ी तो मुझे बाहर रखा जाएगा, इससे मुझे दुख हुआ। चुनाव नतीजे भी पार्टी के लिए पश्चिम बंगाल में अच्छे नहीं रहे। भले ही मैं अस्थायी अध्यक्ष था, जिम्मेदारी तो मेरी ही थी। बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने के साथ ही उन्होंने अपना टार्गेट भी सेट कर दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में हमें टीएमसी के खिलाफ राजनीति करनी है।
अब सवाल ये है कि अधीर रंजन चौधरी के बाद बंगाल कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर सियासी गहमागहमी भी तेज है। राज्य में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस से लेकर विपक्षी दल भाजपा व माकपा तक सबकी नजरें टिकी हुई हैं। इसकी वजह है कि सबके अपने-अपने कारण हैं। कांग्रेस हाईकमान ने गत सोमवार को पार्टी के बंगाल नेताओं के साथ दिल्ली में हुई बैठक में बताया था कि लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद अधीर रंजन चौधरी अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं। अधीर ने भी इसकी पुष्टि की है। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस अब जल्द ही बंगाल में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर सकती है।
यह भी पढ़े: इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चुनावी चंदे पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !












