शनि, अप्रैल 4, 2026

₹1950 Crore Radar Deal: 1950 करोड़ की रडार डील से वायुसेना होगी और मजबूत

₹1950 Crore Radar Deal to Boost IAF Strength

भारत ने 1950 करोड़ की माउंटेन रडार डील की। इससे वायुसेना की निगरानी क्षमता बढ़ेगी और स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूती मिलेगी।

₹1950 Crore Radar Deal to Boost IAF Strength

₹1950 Crore Radar Deal to Boost IAF Strength

नई दिल्ली:

देश की वायु सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए आधुनिक माउंटेन रडार सिस्टम की खरीद को मंजूरी दे दी है। करीब 1950 करोड़ रुपये की इस डील के तहत पहाड़ी इलाकों में निगरानी को बेहतर बनाने के लिए अत्याधुनिक रडार तैनात किए जाएंगे।

यह सौदा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे भारतीय वायुसेना की एयर डिफेंस क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और अधिक प्रभावी हो सकेगी।

₹1950 Crore Radar Deal to Boost IAF Strength

क्या है पूरा समझौता

रक्षा मंत्रालय और BEL के बीच हुआ यह करार ‘बाय (इंडियन-इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप और मैन्युफैक्चर)’ श्रेणी के तहत आता है। इसका अर्थ है कि रडार सिस्टम का डिजाइन, विकास और निर्माण पूरी तरह भारत में ही किया जाएगा।

इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना को दो माउंटेन रडार, उनसे जुड़े उपकरण और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाएगा। यह पिछले वित्त वर्ष के अंतिम बड़े रक्षा सौदों में से एक माना जा रहा है।


स्वदेशी तकनीक पर जोर

इन माउंटेन रडार सिस्टम को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास प्रतिष्ठान ने डिजाइन किया है। निर्माण का जिम्मा BEL को सौंपा गया है।

सरकार का कहना है कि इस परियोजना से ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा मिलेगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। इसके साथ ही विदेशी उपकरणों पर निर्भरता भी कम होगी।


पहाड़ी इलाकों में बढ़ेगी निगरानी क्षमता

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में निगरानी एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे क्षेत्रों में पारंपरिक रडार अक्सर सीमित क्षमता के साथ काम करते हैं। माउंटेन रडार को खासतौर पर इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।

ये रडार सिस्टम खराब मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी सटीक जानकारी देने में सक्षम होंगे। इससे दुश्मन के विमान, ड्रोन या अन्य हवाई गतिविधियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।


वायुसेना को क्या होगा फायदा

इस डील से भारतीय वायुसेना को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा।

  • एयर डिफेंस सिस्टम और मजबूत होगा
  • सीमावर्ती इलाकों में रियल टाइम निगरानी संभव होगी
  • आधुनिक खतरों जैसे ड्रोन और लो-फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स का बेहतर पता चल सकेगा

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की समग्र सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करेगा।


रणनीतिक महत्व भी बेहद अहम

भारत की उत्तरी और पूर्वी सीमाएं पहाड़ी क्षेत्रों से घिरी हुई हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में मजबूत निगरानी प्रणाली का होना बेहद जरूरी है। माउंटेन रडार की तैनाती से न केवल निगरानी बेहतर होगी, बल्कि संभावित खतरों का समय रहते जवाब देना भी आसान होगा।

यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना से देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। BEL जैसी कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट मिलने से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सरकार लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, और यह डील उसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।


निष्कर्ष

1950 करोड़ रुपये की यह माउंटेन रडार डील भारत की रक्षा क्षमताओं को नई मजबूती देने वाली साबित हो सकती है। इससे भारतीय वायुसेना की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर होगी, खासकर पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में।

स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह पहल न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी, बल्कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के और करीब ले जाएगी।

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Author: AK

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